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डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) सागर, मध्य प्रदेश के ललित कला एवं प्रदर्शनकारी कला, संगीत, संचार एवं पत्रकारिता, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान चार विभागों के विभागाध्यक्ष एवं इनके डीन पद से 31 दिसंबर 2023 को सेवानिवृत्त डॉ. ललित मोहन का जन्म 22 दिसंबर सन 1958 ई. में मध्य प्रदेश के सागर में हुआ
हारमोनियम मेकर पिता स्वर्गीय श्री कन्हैया लाल जी खटीक एवं बुंदेली कला संस्कृति की धनी मां स्वर्गीय श्रीमती कस्तूरी बाई के पुत्र ललित मोहन बाल्यकाल से ही उच्च स्तरीय संस्कारों से युक्त थे।
हिंदी साहित्य और पत्रकारिता विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट और Phd उपाधि वाले अद्भुत प्रतिभा के धनी डॉ ललित मोहन ने विविध क्षेत्रों में अपनी सेवाएं प्रदान की वे 1986 से 2023 तक विश्विद्यालय सेवा में रहे।
मध्य प्रदेश शासन सेवा में प्रौढ़ शिक्षा पर्यवेक्षक (पंचायत एवं समाज सेवा विभाग) पद पर सन 1982 से 1984 तक कार्यरत रहे।
आकाशवाणी केंद्र शासन सेवा में बुंदेली कंपीयर,उद्घोषक के पद पर सन 1984 से 1986 तक कार्य किया। यू.पी.एस.सी.से चयनित होकर सन 1992 ई .सन 1994 ई .तक आकाशवाणी में कार्यक्रम अधिकारी रहे।
एन.सी.सी. अधिकारी लेफ्टिनेंट के रूप में सन 1987 से 1992 और 1996 से 1999 तक कार्य किया जहां इन्हें अनेक अवॉर्ड और महानिदेशक प्रशंसा पदक से सम्मानित किया गया।
कला और मीडिया गुरु डॉ ललित मोहन ने पत्रकारिता पाठ्यक्रम दूरस्थ शिक्षा के समन्वयक, B Ed कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य , विश्वविद्यालय प्रेस इंचार्ज ,हॉस्टल वार्डन, यूथ फेस्टिवल और कल्चरल कोऑर्डिनेटर के रूप में कार्य करते हुए अनुशासित , कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार और दानवीर शिक्षक के रूप में पहचान बनाई।
डॉ. ललित मोहन कुशल मंच संचालक और अनेक बुंदेली लोक वाद्यों के साथ हारमोनियम,एकार्डियन,मेलोडियन,बैंजो आदि बजाने में निपुण रहे हैं ।
भोपाल से मुंबई साइकल से , सागर से कन्याकुमारी सागर स्कूटर से यात्रा करने वाले ललित मोहन अनेक साहसिक अभियान में युवावस्था से ही संलग्न रहे ।
दानवीर डॉ. हरीसिंह गौर से प्रेरित होकर विश्वविद्यालय में प्रतिवर्ष गौर जयंती को मेधावी छात्रों और सर्वश्रेष्ठ एनसीसी कैडेट को इनकी दान राशि से सम्मानित किया जाता है।प्राइमरी स्कूल मोराजी सागर में सन 2021 से प्रतिवर्ष पांचवी क्लास के तीन मेधावी छात्रों को तथा वर्ष 2022 से सी.आर. मॉडल स्कूल सागर में प्रतिवर्ष दसवीं क्लास के तीन मेधावी छात्रों को इनकी दान राशि के ब्याज से सम्मानित किया जाता है। अत्यंत आश्चर्य कि उन्होंने सेवानिवृत्ति वर्ष में स्वयं के पुस्तकालय संग्रह की लगभग एक हजार से अधिक पुस्तकें छात्रों को दान कर दीं।
डॉ.ललित मोहन की लेखन प्रतिभा को अनंत पथ काव्य संग्रह, विजयपथ देशभक्ति गीत संग्रह, संसदीय पत्रकारिता और हिंदी प्रेस तथा परफॉर्मिंग आर्ट्स और मीडिया पुस्तक के रूप में देखा जा सकता है,जिन्हें ये निःशुल्क वितरित करते रहते हैं।
लिम्का रिकॉर्ड बुक में दर्ज विजय पथ ,और इनकी जीवनी पर आधारित पुस्तक पगडंडी के राही डॉ ललित मोहन को इस वेब साईट में देख सकते हैं। इनके लिखे और संगीत बद्ध कुछ देशभक्तिं गीतों के ऑडियो वीडियो भी वेब साईट में संकलित हैं।।

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